" अल्फ़ाज़ - ज़ो पिरोये मनसा ने "

ज़र्रों में रह गुज़र के चमक छोड़ जाऊँगा ,
आवाज़ अपनी मैं दूर तलक छोड़ जाऊँगा |
खामोशियों की नींद गंवारा नहीं मुझे ,
शीशा हूँ टूट भी गया तो खनक छोड़ जाऊँगा||

वो स्कूल का गुज़रा ज़माना ||



वो कन्धे पे बस्ता और हाथों में बोतल ले जाना |
मुझे  बहुत याद आता  हैं वो स्कूल का ज़माना ||

वो स्कूल जाने को रिश्वत में पापा से चॉकलेट पाना |
सुबह सुबह स्कूल जाने को मम्मी का मुझे सजाना ||

interval  में  बैठ कर  वो लंच  सबके  साथ  खाना  |
'मेरी मम्मी के पराँठे सबसे  अच्छे' सबको बताना ||

कक्षा में  मुझे बातें करते  देख मैडम  का आंखे  तिमतिमाना |
फिर girl -boy- girl  sitting  की हसीन  पनिसमेंट पाना ||

वो पेनों की  लड़ाई और  हाथों  से चिड़िया  उड़ाना |
नोटबुक के पीछे क्रॉस v/s ज़ीरो गेम का पाया जाना ||

वही कहीं मिलती थी साइलेंट क्लास में बातों के लिए लिखाई |
दोस्त का लिखा crush का नाम ,फिर उसपे ज़ोरों से पेन घिसाई ||

आगे  वाली छोरी की वो बड़े ज़ोर से चुटिया घुमाना |
रूठ भी जाए तो प्यारी सी मासूमियत से उसे मनाना ||

एक्जाम में answer same होने पे मास्टर का चिल्लाना |
"गधे  सवाल भी तो same था " दिल  से  आवाज़ आना ||

घंटी की आवाज़ सुनते ही ज़ोर से हल्ला मचाना |
छुट्टी  की घंटी  पे मैडम  से पहले निकल जाना ||

बारिश   के  दिनों में  वो  कश्तियों  की  रेस  लगाना |
पत्थरों को ठोकर मारते , हाथों में हाथ लिए घर जाना ||

कभी  रोते तो  कभी यूँ  ही  हँसते  मार सह  जाना |
कुछ  ऐसा  ही  बिगड़ैल  था  मेरे स्कूल  का  ज़माना ||

अब ना मिलती हैं पापा से रिश्वत , न लंच में मम्मी के पराँठे |
ना  नोटबुक के गेम बचे , न पड़ती अब मैडम ज़ी की डांटे ||
पानी  बदल गया बोतल का , crush भी अपना न रहा ,
वक़्त ने अब छीन लिया मुझसे वो खुशियों का खज़ाना ||
सच  में  जब  भी पढ़ता हैं  दिल हमारा  अतीत   पुराना |
आंखो में अश्क ला देता हैं वो स्कूल का गुज़रा ज़माना ||


||  मनसा  ||


19 comments:

वो स्कूल जाने को रिश्वत में पापा से चॉकलेट पाना |
सुबह सुबह स्कूल जाने को मम्मी का मुझे सजाना |

:)...Bhaut Sunder...

 

बहुत अच्छा लिखा हैँ....ये कविता पढकर मुझे भी अपने स्कूल के दिनो की याद आ गयी...:(बहुत अच्छा लिखा हैँ....ये कविता पढकर मुझे भी अपने स्कूल के दिनो की याद आ गयी...:(

 

बहुत याद आता है वो स्कूल का गुजरा जमाना... बहुत सुंदर रचना

 

सुन्दर और प्रभावी प्रस्तुति ||

 

वाह....बहुत खूब........ये दौलत भी ले लो की तर्ज़ पर बनी खुबसूरत पोस्ट है......वाकई बचपन के हसीं गलियारों में ले गयी ये पोस्ट|

 

क्जाम में answer same होने पे मास्टर का चिल्लाना |
"गधे सवाल भी तो same था " दिल से आवाज़ आना ||

बेहद खुबसुरत लगा ..आपका 'स्कुल का ज़माना 'आप ही की तरह मासूम .....
http://armaanokidoli.blogspot.com/
प्रेम -सेतु

 

bahut acchi lagi rachna ... bachpan ki yaad dila di...

Hamari nayi post bhi dekhiye ..
Life is Just A Life

 

आपकी रचना बापिस बचपन में लौटा ले लेगी |बहुत अच्छी रचना के लिए बधाई
आशा

 

बहुत सुन्दर रचना लिखा है आपने! मैं अपने बचपन क दिनों में लौट गयी! काश वो दिन फिर से वापस लौटकर आते! सबसे ख़ुशी का वक़्त था स्कूल में जाना, पढ़ना और खेलकूद करना!
मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
http://seawave-babli.blogspot.com/
http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

 

स्कूल के गुजरे जमाने की याद में बहुत सुन्दर रचना ...

 

कोमल भावों से सजी ..
..........दिल को छू लेने वाली प्रस्तुती
आप बहुत अच्छा लिखतें हैं...वाकई.... आशा हैं आपसे बहुत कुछ सीखने को मिलेगा....!!

 

वाह पहली बार पढ़ा आपको बहुत अच्छा लगा.
आप बहुत अच्छा लिखतें हैं. हैं और गहरा भी.
बधाई.

 

याद आती है मुझको बचपन मधुर याद तेरी
गया ले गया तू जीवन की सबसे मस्त खुसी मेरी ...

 

घंटी की आवाज़ सुनते ही ज़ोर से हल्ला मचाना |
छुट्टी की घंटी पे मैडम से पहले निकल जाना ||

बारिश के दिनों में वो कश्तियों की रेस लगाना |
पत्थरों को ठोकर मारते , हाथों में हाथ लिए घर जाना ||


लाजवाब, सुन्दर लेखनी को आभार...

 

प्रिय मनीष खेदावत जी प्यारी रचना बचपन दिखा दिया आप ने -रंग बिरंगे दृश्य आगे की छोरी की चुटिया घुमाना क्या बात है ...
आनंद दायी -
कोई लौटा दे मेरा बचपना सुहाना ...
निम्न पंक्तियाँ बहुत भायीं
भरा रहे ये हाथ यों ही देते रहें समाज को -शुभ कामनाएं
भ्रमर ५

सच में जब भी पढ़ता हैं दिल हमारा अतीत पुराना |
आंखो में अश्क ला देता हैं वो स्कूल का गुज़रा ज़माना ||

वो स्कूल जाने को रिश्वत में पापा से चॉकलेट पाना |
सुबह सुबह स्कूल जाने को मम्मी का मुझे सजाना ||

 

har dil me bachpan hamesha tamaam umr rahta hai. kyu itne udas ? jara si vahi shaitaniya ek bar fir se karo...dekho sab kuchh laut aaya sa lagega.
me to aaj bhi karti hun..jaise ghanti bajte hi jor se chillana aur auro se aage nikal jana. ha.ha.ha.

 

sach bachpan hota hi itna pyaara hai ....kabhi bhula nahin jata

 

बहुत सुन्दर लिखा है आपने... बचपन के दिन स्कूल के याद दिला दिए... लगता है आप्बहुत नौटी नौटी रहे होंगे स्कूल के दिनों पर कविता बहुत गंभीरता से बनायीं कि सब कुछ सजीव लगता है..सादर