" अल्फ़ाज़ - ज़ो पिरोये मनसा ने "

ज़र्रों में रह गुज़र के चमक छोड़ जाऊँगा ,
आवाज़ अपनी मैं दूर तलक छोड़ जाऊँगा |
खामोशियों की नींद गंवारा नहीं मुझे ,
शीशा हूँ टूट भी गया तो खनक छोड़ जाऊँगा||

...क्या मुझे प्यार का सलीका भी नहीं आया था ???



जब उसने कहा था मुझसे , मैं चाहती हूँ किसी और को ,
"तुम्हारी खुशी सबसे ऊपर है मेरे लिए" शब्द बस इत्ते ही निकाल पाया था |

लिखा था उसका नाम कमरे के हर कोने में , चूमता था हरदिन उन्हे ,
गम की उस रात , मैंने हर नाम को चूम चूम के मिटाया था ||

कल शादी थी उसकी , बुलाया नहीं था उसने , मैं गया फिर भी ,
जिन हाथों से देता था तोहफा , उन्हीं से बरातियों का सोफा सजा के आया था ||

मुझे तो गिला भी नहीं की आज उसे मैं याद भी न रहा ,
उसकी मोहब्बत में , मैं भी तो सारे जहाँ को भुला के आया था ||

उससे तो मैं बेवफाई का हिसाब माँगने क़ाबिल भी न हो सका ,
उसके इश्क़ के आगोश में , मैं भी तो कई दिल तोड़ के आया था ||

बस एक ख़याल ने उसकी मोहब्बत में ज़ान फ़ना होने से बचा ली ,
उसे शायद मिल जाए दूजा ,पर माँ को मैं बड़ी मन्नतों से मिल पाया था ||

जिनकी चाह था मैं ,उन अपनों को छोड़ भागा था मैं उस गैर के पीछे ,
लोग कहते हैं ," मनसा " तूझे तो प्यार का सलीका भी नहीं आया था ||

15 comments:

bahut gahre jajbaton ko abhivyakt kiya hai .vaise MAA!se badhkar to koi hota bhi nahi .

 

Mansa bhai .. aapne to lagta hai hamara dard hi uker diya ho ... Bahut acchi rachna.

 

man gaye ...bahut sundar

 

गहरे भाव और अभिव्यक्ति के साथ लाजवाब रचना लिखा है आपने! आपकी लेखनी को सलाम!

 

तुमने ही तो --
दो बरस पहले
भेजी थी
अनाम पाती |
संभाल कर
रखनी थी
वो थाती |
पर मैं तो था
दीवाना उनका |
कल, हो गया है
निकाह जिनका--

 

बहुत गहरे भावों से ओत प्रोत रचना|

 

उससे तो मैं बेवफाई का हिसाब माँगने क़ाबिल भी न हो सका ,उसके इश्क़ के आगोश में , मैं भी तो कई दिल तोड़ के आया था ||
बस एक ख़याल ने उसकी मोहब्बत में ज़ान फ़ना होने से बचा ली ,उसे शायद मिल जाए दूजा ,पर माँ को मैं बड़ी मन्नतों से मिल पाया था ||
kamal hai bahut der tak sochti rahi kitni gahri baat kahi hai aapne
bahutu bahut badhai
rachana

 

itni gehri anubhuti rakhte ho aap.waah shaandar rachna ke liye aapko hatdik badhai...........
pahli baar aapke bolg pe aaya bahut -bahut accha laga..........

 

बस एक ख़याल ने उसकी मोहब्बत में ज़ान फ़ना होने से बचा ली ,उसे शायद मिल जाए दूजा ,पर माँ को मैं बड़ी मन्नतों से मिल पाया था ||

बहुत खूब ... अच्छी प्रस्तुति

 

bahut gehre jajbato ko piroya hai aapne kavita me...vaise sahi kaha hai use to or bhi mil jayenge par maa se badkar kyahoga

 

very nice.....keep it up.

 

अच्‍छा लगा आपके ब्‍लॉग पर आकर....आपकी रचनाएं पढकर और आपकी भवनाओं से जुडकर....
कभी फुर्सत मिले तो हमे भी पढ़े
संजय भास्कर
http://sanjaybhaskar.blogspot.com